How Many Types of Bank Accounts in India | भारत में बैंक अकाउंट कितने प्रकार के होते है?

इस पोस्ट में यही बताने वाला हूँ कि बैंक अकाउंट कितनी तरह के होते है और कौन से अकाउंट की क्या खूबियाँ और क्या सीमायें होती है।

How Many Types of Bank Accounts in India


बैंक में अकाउंट होना आज हर आदमी की एक अहम् जरुरत है, प्रधानमंत्री जन धन योजना के बाद तो हर गरीब से गरीब आदमी के पास अपना बैंक खाता हो गया है। 

एटीएम का इस्तेमाल करते समय आपने देखा होगा कि आपसे अपने बैंक खाते का विवरण जैसे Current या Saving Account होने के बारे में पूछा जाता है। लेकिन बहुत ही कम लोग ये जानते है कि चालू खाता यानि (Current Account) और बचत खाता यानि (Savings Account) में क्या अंतर होता है और उनकी क्या खूबियाँ और क्या सीमायें होती है। 

आज मै आपको How Many Types of Bank Accounts in India इस ब्लॉग पोस्ट में यही बताने वाला हूँ कि बैंक अकाउंट कितने प्रकार के होते है और कौन से अकाउंट की क्या खूबियाँ और क्या सीमायें होती है। 

बैंक में आमतौर पर चार तरह के खाते होते है और ये चारो खाते अलग-अलग जरूरतों के हिसाब से खोले जाते है। 

1) बचत खाता (Savings Account)

यह खाता आम लोगो के लिए होता है और निजी लेनदेन निपटाने के काम आता है लेकिन इस अकाउंट पर लेनदेन की सीमायें होती है, अमूमन एक दिन में बचत खाते से ज्यादा से ज्यादा 5 लेनदेन किये जा सकते है। 

बचत खातो में जमाराशि पर बैंक ब्याज भी देते है ज्यादातर बैंकों में ये ब्याज की दर 4% से 6% के बीच में होती है इसीलिए बचत खाता खुलवाने से पहले बैंक कितना ब्याज दे रहा है ये जरुर जान लेना चाहिए। 

यहाँ ये भी जानना जरुरी है कि सेविंग्स अकाउंट के ब्याज पर टैक्स लगता है, हालाँकि दस हजार रुपये सालाना ब्याज पर टैक्स में राहत का प्रावधान है। 

बचत खाता रखने वालो को बैंक की ओर से चेक बुक, डेबिट कार्ड या ATM कार्ड, क्रेडिट कार्ड, इन्टरनेट बैंकिंग और मोबाइल बैंकिंग जैसे सुविधाये मिलती है। इनमे ज्यादातर सुविधाये मुफ्त होती है लेकिन कुछ सेवाओ पर बैंक सर्विस फीस या शुल्क भी लेते है। 

जैसा कि नाम से ही पता चलता है कि सेविंग अकाउंट सेविंग करने के लिए ही बना है, हम सभी लोग ही चाहते है कि हमारे द्वारा जमा की गयी पैसो पर इंटरेस्ट या ब्याज मिले और कम से कम अपने अकाउंट से पैसे निकाले, जितना जमा हो जाये उतना अच्छा है। 

कोई भी आदमी किसी भी कंपनी में काम करता हो चाहे सरकारी नौकरी में हो या प्राइवेट नौकरी, बिजनेसमैन हो या स्टूडेंट किसी भी बैंक में अपना सेविंग्स अकाउंट खोल सकता है। बैंक खाता खोलने के दस्तावेज आपका आईडी प्रूफ और एड्रेस प्रूफ देकर खोल सकते है।

जैसा कि मैंने बताया सेविंग्स अकाउंट में खाताधारक को जमा की गयी राशि पर इंटरेस्ट भी मिलता है। बचत खाता के धारक कभी भी बैंक से अपने जमाधन को निकाल सकते है और कभी भी बैंक में पैसे जमा कर सकते है। 

सेविंग्स अकाउंट में पैसे जमा करने की संख्या में तो किसी भी प्रकार की बाधा नही होती, लेकिन पैसे निकालने की संख्या में कुछ लिमिट जरुर होते है। जैसे कि आप 50 रुपये से कम नही निकाल सकते है या ATM से 6 महीने के अंदर 30 बार से ज्यादा पैसे नही निकाल सकते है। 

चालू खाते की तरह आप कहीं भी कभी भी जितना चाहे उतना पैसा सेविंग अकाउंट से नही निकाल सकते है। ज्यादातर बैंक ग्राहक को अपने अकाउंट में कम से कम राशि यानि Minimum Account Balance रखने के लिए बाध्य करते है और ऐसा नही करने पर उनसे जुर्माना भी वसूलते है। 
इंटरनेट बैंकिंग और मोबाइल बैंकिंग के जरिये आप अपने जरुरी बिलों का भुगतान भी कर सकते है, ऑनलाइन शॉपिंग कर सकते है और किसी दूसरे को फण्ड ट्रान्सफर भी कर सकते है। 

डेबिट कार्ड के ज़रिये भी पैसा निकाल सकते है साथ ही शॉपिंग वगैरह भी करी जा सकती है। आमतौर पर बचत खाते में कम से कम राशि रखने की शर्त होती है, सरकारी बैंकों में ये राशि 500 से 1000 तक हो सकती है। लेकिन प्राइवेट बैंक इस मामले में अलग है वहां 5000, 10000 से लेकर 25,000 रुपये तक की राशि रखना अपने अकाउंट में जरुरी होता है। 

हालाँकि कुछ खातो जैसे कि स्टूडेंट अकाउंट, प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत खोले गए खाते, इन जैसे खातो में शुन्य बैलेंस भी रखा जा सकता है। 

2) चालू खाता (Current Account)

चालू खाता आमतौर से बिजनेसमैन, फर्म या कंपनी वगैरह के लिए होता है जिनके अकाउंट में पैसो का बहुत ज्यादा फ्लो (Flow) होता है यानि लेनदेन होता है ऐसे खातो में लाखो रुपये आते है हर दिन और निकाल भी लिए जाते है। 

तो ऐसे लोग अपने चालू खाते में पैसे रखते है ऐसे अमीर लोगो या फर्म को इन्वेस्टमेंट करने या अपने पैसे पर ब्याज या इंटरेस्ट लेने में कोई रूचि नही होता है। चालू खाते की खूबी ये है कि इसमें पैसे जमा करने या निकालने की कोई सीमायें नही होती है। चालू खाते में धारक को इंटरेस्ट नही मिलता है और हाँ, बैंक उनसे सर्विस चार्ज जरुर वसूलते है। 

चालू खाता बचत खाते से बिलकुल अलग होता है क्योंकि ये खाता खास तौर से कारोबारियो के लिए होता है, बिजनेसमैन के लिए होता है। 

इस खाते में बचत खाते की तरह लेनदेन की कोई सीमा नही होती है यानि एक दिन में आप कितने भी Transaction कर सकते है। चालू खाते में जमाराशि पर ब्याज नही मिलता है, लेकिन इस खाते का सबसे बड़ा फायदा ये होता है कि बैंक कारोबारियों को इसके जरिये पैसे देती है ताकि उनके बिज़नेस में रुकावट नही आये साथ ही बैंक चालू खाते में ओवरड्राफ्ट की सुविधा भी देती है यानि चालू खाते से कारोबारी उसमे मौजूद रकम से ज्यादा पैसा भी निकाल सकते है। 

किसी चालू खाते से कितनी राशि ओवरड्राफ्ट की जा सकती है इसका निर्धारण बैंक खाताधारक के टर्नओवर, मुनाफा वगैरह को ध्यान में रखकर तय करते है। चालू खाता कोई भी व्यक्ति निजी रूप से या संयुक्त खाते के तौर पर खोल सकता है इसके आलावा कंपनियों, प्राधिकरणों, ट्रस्टो, समाजसेवी संस्थाओ या सोसाइटी द्वारा भी ये खाते खोले जा सकते है। 

चालू खाते पर बैंक कई तरह की ऐसी सुविधाये देते है जिनसे खाताधारको, कंपनियो या संस्थाओ को अपने कामकाज में आसानी होती है। इनमे डिमांड ड्राफ्ट या पे आर्डर जारी करने, NEFT/RTGS से फंड ट्रान्सफर, Doorstep बैंकिंग, चेक कलेक्शन, भुगतान और मुफ्त कैश डिपाजिट वगैरह शामिल है। 

3) आवर्ती जमा खाता (Recurring Deposit Account)

RD अकाउंट में वो लोग खाता खोलते है जो एक निश्चित राशि नियमित रूप से जमा करना चाहते है जिससे कि उन्हें अधिक दर पर ब्याज या इंटरेस्ट मिले। RD अकाउंट में एक खास राशि तय अवधि के लिए जमा की जाती है और तय की गयी अवधि के समाप्त हो जाने पर ब्याज के साथ कुल राशि का भुगतान कर दिया जाता है। 

जमा करने की कम से कम अवधि एक साल और ज्यादा से ज्यादा दस साल की होती है। ब्याज की दर जमा पैसे और जमा की गयी अवधि के हिसाब से विभिन्न प्लान में अलग-अलग हो सकती है। 

जैसे कि आप अगर हर महीने दस हजार रुपये जमा कर रहे है तो आपको ज्यादा इंटरेस्ट या ब्याज मिलेगा उनलोगों की तुलना में जो चार हजार रुपये महीने में जमा कर रहे हो उन्हें कम इंटरेस्ट मिलेगा। 

वहीं अगर आप ज्यादा अवधि के लिए पैसे जमा करने वाले है तो ज्यादा इंटरेस्ट मिलेगा और कम अवधि के लिए तो कम इंटरेस्ट मिलेगा। 

RD अकाउंट में समय से पहले निकासी यानि पैसे निकालने की सुविधा बिलकुल नही होती है, वैसे बैंक चाहे तो खाते की अवधि पूरी होने से पहले उसे बंद करने की अनुमति दे सकता है। आवर्ती जमा खाते यानि RD अकाउंट में सिंगल या संयुक्त खाता (Joint Account) भी खोले जा सकते है। 


4) सावधि जमा खाता (Current Account Deposit / Fixed Deposit Account)

फिक्स्ड डिपाजिट अकाउंट में एक खास अवधि के लिए एक विशेष राशि रखी जाती है यहाँ एक बार ही पैसा जमा कर सकते है और एक बार ही निकाल सकते है। 

RD अकाउंट की ही तरह इस खाते में भी समय से पहले पैसे निकाल नही सकते है, तय की गयी अवधि से पहले पैसे निकलने से आपको बैंक को पेनल्टी यानि जुर्माना देना पड़ता है जो कि हर बैंक के द्वारा अलग-अलग तय की जाती है और अकाउंट को हमेशा के लिए बंद कर दिया जाता है। 

फिक्स्ड डिपाजिट में उपभोगता को हाई इंटरेस्ट रेट दिया जाता हैं, इंटरेस्ट रेट जमा पैसे और जमा की अवधि यानि डिपाजिट पीरियड के आधार पर तय की जाती है जो कि ज्यादा से ज्यादा 10 साल की होती है। 

आज आपने जाना कि बैंक अकाउंट कितने प्रकार के होते है और कौन से अकाउंट की क्या खूबियाँ और क्या सीमायें होती है। अगर आपको मेरा ये पोस्ट बैंक खाते कितने प्रकार के होते है How Many Types of Bank Accounts in India पसंद आया हो तो कृपया इसे शेयर कर मेरी मदद जरुर करे।

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How Many Types of Bank Accounts in India | भारत में बैंक अकाउंट कितने प्रकार के होते है?
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